"अमीश त्रिपाठी" शिव त्रय भाग - 1 "मेलूहा के मृत्युंजय"
आज हम बात करेंगे जाने माने लेखक अमीश त्रिपाठी के बारे में ,उनके द्वारा लिखी रचनाओं और किताबों के बारे में जो भी कहा जाए वह बहुत कम है।
वह वाकई में अद्भुत विचारक हैं ,जो पौराणिक कल्पना अतीत को खोदते हुए भविष्य की संभावनाओं में छलांग लगाती है। उनकी किताबों की श्रंखला, इतिहास की परतें खोलते हुए हमारी चेतना को झकझोर देती है, ऐसा कहा "दीपक चोपड़ा", जाने-माने आध्यात्मिक गुरु और सफल लेखक ने।
ऐसे ही किताब के शुरआत में ही बड़े बड़े लेखकों ने अपने बहुमूल्य शब्दो से किताब को सुसज्जित किया है, जिसे पढ़ने के बाद पाठक की उत्सुकता और बढ़ जाती है।
आज हम बात करेंगे में "शिव रचना त्रय " भाग -1 , "मेलूहा के मृत्युंजय" के विषय में, अमीश त्रिपाठी की इस सीरीज के अगले दो भाग "नागाओं का रहस्य" और "वायु पुत्रो की शपत" के बारे में मै अपने अगले ब्लॉग में चर्चा करूँगी....
शिव रचना त्रय भाग-1 मेलुहा के मृत्युंजय-
क्या कभी किसी ने सोचा होगा की भगवान भी आज से 1900 साल पहले एक साधारण इंसान हुआ करते थे, वे एक सामान्य जीवन यापन करते थे, हमारी ही तरह खाते पीते सोते जागते थे,बल्कि उन्हें इस बात की खबर ही नही थी आज से 1900 साल बाद उन्हें भगवान के नाम से पूजा जायेगा, उन्होंने सिर्फ और सर्फ अपने कर्मो का निर्वाह बहुत अच्छे से किया और खुद के मकसद को पहचान कर उसे पूर्ण करके स्वर्ग को सिधार गये,फिलहाल किसी ने सोचा हो या न सोचा हो, लेखक अमीश त्रिपाठी ने इस बात को बहुत अच्छे से सोचा भी हैं और अपनी किताब के माध्यम से समझाया भी हैं।
उनके विषय में बहुत बड़े बड़े लेखक, फिल्मकार, विचारकों ने उनकी लेखन शैली की टिप्पणी की है और अमीश त्रिपाठी ने अपनी किताब के अन्य भागो के माध्यम से उनकी कहीं बात को सार्थक करके दिखाया हैं।
किताब के विषय में -
अगर मै उस किताब से आज के समाज की तुलना करूँ तो मैं यही कहना चाहूँगी, की हम और आप आज एक आम इंसान हैं लेकिन एक दिन अपने कर्मो से हम भी पूजे जायेंगे उसके लिए आपको खुद को और दुनिया में आने के मकसद को खोजना होगा जैसे शिव जी ने अपने समय में खुद को ढूढ़ा और व्यवस्थित किया....और धीरे धीरे पर्वतों पर विजय पाते हुए कैलाश पर्वत मे विराजमान हो गये।
किताब की शुरुआत शिव जी के 21 वे साल से शुरू होती हैं लेखक ने इस बात को शुरू में ही कह दिया है....
इस चित्रा में आप देख सकते है-
तो ये थी शिव रचना त्रय का भाग -1,"मेलूहा के मृत्युंजय" .....
अंतिम शब्द-
मैं यही कहना चाहूँगी की आप एक बार इस किताब को जरूर पढ़े ये भगवान शिव की कहानी से ज्यादा आपकी और हमारी, एक आम जनमानस की कहानी है।
नीचे मैं आपको सारे लिंक दे रही हूँ जहाँ से आप ये किताब आसानी से प्राप्त कर सकते हो-
फिल्पकार्ट पर इस किताब इंग्लिश वर्जन ₹175 का हैं और हिंदी वर्जन 248 का हैं-
https://www.flipkart.com/the-immortals-of-meluha/p/itmezunq2wcyj83b .
अमेज़न में इस किताब का का मूल्य फिल्पकार्ट के मूल्य के आबराबर ही है नीचे मैंने उसका भी लिंक दे दिया हैं-
यदि आप मेरे रिव्यू के बाद किताब खरीद कर पढ़ते है तो मुझे कमेंट के जरिये बताना न भूले.....
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किताबे और किस्से की पूरी टीम की तरफ से सभी पाठको से अनुरोध हैं की घर पर रहे और सेफ रहे ।



